भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने कोलम्बो में गत 11 मई को श्रीलंका को फाइनल मे 177 रन से हराकर महिलाओं का एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेन्ट लगातार चौथी बार जीतने मे कामयाब रहीं फाइनल मे 97 रन की पारी खेलने वाली भारत की आशा रावत को मैन आफ द मैच घोषित किया गया ।2004 से शुरु हुए इस टूर्नामेन्ट का खिताब लागातार चारो बार भारत ने ही जीता है। ये चारो फाइनल मुकाबला श्रीलंका के साथ ही हुएं हैं तथा चारो बार भारत ने श्रीलंका को हराकर यह खिताब अपने नाम कर लिया.......
sunil kumar......
Sunday, June 15, 2008
Tuesday, February 26, 2008
Hey ... Watch & Enjoy
Click on this link to view the video
http://video.google.com/videoplay?docid=2472873294547417399
The Audition Day : Making
http://video.google.com/videoplay?docid=2472873294547417399
The Audition Day : Making
Friday, February 1, 2008
क्यों नींद नही आती है रात भर
ऐसे लोगों को वाक़ई ख़ुशनसीब कहा जा सकता है जो रात भर पूरी नींद लेने के बाद सुबह सीधे अलार्म घड़ी की टिक-टिक होने पर ही जागते हों लेकिन अलार्म घड़ी की यही टिक-टिक तब दुश्मन की तरह लगती है, जब आपकी रात करवटें बदलते बीती हो या फिर कई कारणों से नींद ही न पूरी हो पाई हो.और जब नींद पूरी नहीं होती तो ज़ाहिर है, दिन ऊँघते हुए या थकान भरी उकताहट के साथ बीतता है.कई लोगों के साथ सोते वक़्त बार-बार नींद टूटने का अहम कारण 'ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्नोया' (ओएसए) होता है.इसे नींद में ख़लल डालने वाली बीमारी कहा जा सकता है.कारणइस बीमारी में गले के भीतर सांस लेने का स्थान लगातार संकरा होता जाता है और सोते वक़्त ये लगभग बंद होने लगता है.इससे सांस की हवा फेफड़ों तक नहीं पहुँच पाती और मष्तिष्क में ऑक्सीजन की लगातार कम होती मात्रा से व्यक्ति की नींद अचानक खुल जाती है.माना जाता है कि खर्राटे लेने वाले लोग ही अधिकतर इस बीमारी के शिकार होते हैं और वे रात में बमुश्किल तीन घंटे की नींद ले पाते हैं.नींद नहीं आने से परेशान लोगों की तादात में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है.स्कॉटलैंड के शहर एडिनबरा स्थित एक अस्पताल में निद्रा औषधि विभाग के डॉक्टर टॉम मैके के मुताबिक़ इस समस्या के बारे में अभी कई चीज़ों का पता नहीं चल पाया है.उन्होंने बताया कि स्कॉटलैंड में इससे प्रभावित ऐसे लगभग 40 हज़ार लोग हैं जो खुद नहीं जानते कि वे ओएसए यानी नींद में ख़लल डालने वाली बीमारी के शिकार हैं.मैके के अनुसार, इसका ठीक ठीक पता इसलिए नहीं चल पाता क्योंकि लोग खर्राटे लेने, सांस लेने में बाधा और दिन में ऊँघते रहने जैसी समस्याओं के कारणों के बारे में ठीक-ठीक नहीं जानते.लेकिन ब्रिटेन की स्वास्थ्य सेवा के एक बोर्ड ने इस बीमारी से परेशान लोगों के लिए कुछ कारगर इलाज का दावा किया है.इलाजइस बीमारी से प्रभावित लोगों का घर से अलग आरामदायक होटल में इलाज किया जाता है.चिकत्सकों अनुसार, इलाज के लिए मरीज़ को होटल के बेडरूम में रखा जाता है जहाँ उसके सारे परीक्षण सहूलियत से किए जा सकते हैं.मरीज़ों से बातचीत करने के बाद उन्हें इलाज के लिए विशेष किट दी जाती है और इसे इस्तेमाल करने का तरीक़ा बताया जाता है.रात में सोते वक़्त इस किट को लगाने के बाद सुबह नतीजों का परीक्षण किया जाता है. यदि ओएसए की समस्या हुई तो मरीज़ो को सीधे सांस संबंधी समस्या के लिए दवा दे दी जाती है.उन्होंनें बताया कि सोते समय एक किट का एक छोटा सा मास्क पहनना होता है जिससे पहले एक या दूसरे दिन ही 80-90 फ़ीसदी लोगों को अच्छी नींद आना शुरू हो जाती है.
ये कैसी सजा
कानुन हमेशा दावा करता है कि क़ानुन के नज़र में सज़ा के नियम सभी के लिए बराबर होते है। वहां अमीरी ग़रीबी नहीं देखी जाती,कोई सख़्शियत हो या आम आदमी यह नही देखा जाता। कुछ अरसा पहले क़ानुन के इसी पैमाने पर सलमान खान और संजय दत्त को उनके अपराधों की सजा सुनाइ गइ। ईन्हें चार और छ. साल की सज़ा सुनाई गई ।पर देखा जा रहा है कि किसी तरह इन शख्शीयतों ने अपनी जमानत का जुगाड कर ही लिया। सवाल है कि अगर किसी आम आदमी से ग़लती से अपराध हो जाता तो क्या वह जेल की सलाखों के बाहर रह सकता था। सलमान ,संजय के मामले से तो लगता है कि हर स्तर पर पैसा और रसूखदारों की ही चलती है।अगर यह बात ग़लत है तो संजय दत्त और सलमान खान को इस वक्त जेल में होना चाहिए था।
इंपोर्ट का एक्सपोर्ट
पाकिस्तान मे बहुत समय से एक चीज़ बडे एअतियात से बनई जा रही है बनाने वाले उसे जिहाद कहते है बाकी दुनिया आतंकवाद पाकिस्तान मे यह माल खास एक्सपोर्ट के लिए तैयार किया जा रहा है कुछ समय पहले हालात बदले तो उन्हें लगा कि इस माल कि जरुरत तो अपने मुल्क मे भी है ऐसे मे वे माल जो वी सिर्फ एक्सपोर्ट के इरादे से बना रहे थे उसे अपने मुल्क मी भी खपाने लगेइसे कहते है एक्सपोर्ट का इंपोर्टजेहादियों कि एक बात तो माननी पडेगी वे जो कुछ करते है बड़ी लगन से करते है अपने माल कि क्वालिटीमे वे कोई समझौता नही करते हमेशाबढ़िया से बढ़िया माल सप्लाई करते है आतंकवाद बहुत ही उन्नत बाज़ार है साधारण बाज़ार सेल के मौसम मे ज्यादा से ज्यादा एके के उप्पर एक माल मुफ्त देता है परन्तु आतंकवाद ऐसे छोटी मोटी सेल नही लगाता किसे एक को मारने जाता है तो साथ मे दस बीस मुफ्त मी मार आता हैकोई दूसरा दुकानदार दस बीस मुफ्त मी नही देता परन्तु आतंकवाद के दुकानदार देते है आजकल गलोब्लिजेशन का ज़माना है बाकी दुनिया व्यापार का ग्लोब्लिज़शन कर रही है कठमुल्ले जेहाद का कर रहे है वह न सिर्फ आतंकवाद बनने मी एक्सपर्ट है बल्कि उसका एक्सपोर्ट करने मे भी एक्सपर्ट है जी हाँ वे जब चाहे आपके यहाँ होम डिलिवरी कर सकते है आतंकवाद ऐसा मुफ्त का माल है जिसिकी डिलिवरी आपको न चाहते हुए भी लेने पड़ते हैलोग ज़हिडियो को पिछ्रा समझते है यह बहुत गलत बात है ज़हादी सोच मे जितना पीछे हू आतंकवाद मे बिल्कुल भी पीछे नही है वे आधुनिकतम टेक्नोलॉजी का इस्तमाल करते है वे आधुनिक विचारो कि जानकारी भले न रख्तो हू लेकिन आधुनिक हथिरो कि जानकारी ज़रूर रखते है दूसरो के विचार आपनाने मे उनकी सोच आरे आती है दूसरो के हथियार आपनाने मी वही विचार आरे नही आती इस सोच को क्या नाम देना चहियेअमेरिका और eeurope के लोगो को एक चिंता बारे ज़ोर से सता रही है कल को पाकिस्तान के परमाणु बम ज़हिदेओ के हाथ लग गए तो?लग तो सकते है पेर उससे डरने कि कोई ज़रूरत नही है आतंकवादी अपने बम का इस्तेमाल अपने घर मी भी कर सकते है आप कहेंगे यह तो निहायत ही बेहुकुफी वाला इएडिया है जी हाँ,है,लेकिन क्या आप आतंकवादियो से आक्ला के इस्तमाल कि उम्मीद कर सकते है
अंतिम समय में बापू ने क्या कहा था ?
क्या राष्ट्रपिता गांधी ने प्राण त्यागते हुए,"हे राम" वाकई में कहा था? बापू पर लिखी एक नई किताब महात्मा गांधी-ब्रहमचर्य के प्रयोग के मुताबिक में दावा किया गया है कि अंतिम वक्त में उन्होंने ये शब्द नहीं कहे थे।
पत्रकार दयासागर शुक्ल 'सागर'ने यह किताब लिखी हैं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर माना जाता है कि 60साल पहले,30जनवरी 1948 को नाथुराम गोडसे की गोली लगने से महात्मा गांधी गिर पडे थे। तब सिर्फ उनकी पोती मनु ने उन्हें हे राम बोलते हुए सुना था। शुक्ल ने इस मान्यता पर सवाल उठाया है। उन्होंने दावा किया है कि अंतिम सांसें लेते हुए गांधी जी ने 'आह' कहा था न कि हे राम ?
पत्रकार दयासागर शुक्ल 'सागर'ने यह किताब लिखी हैं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर माना जाता है कि 60साल पहले,30जनवरी 1948 को नाथुराम गोडसे की गोली लगने से महात्मा गांधी गिर पडे थे। तब सिर्फ उनकी पोती मनु ने उन्हें हे राम बोलते हुए सुना था। शुक्ल ने इस मान्यता पर सवाल उठाया है। उन्होंने दावा किया है कि अंतिम सांसें लेते हुए गांधी जी ने 'आह' कहा था न कि हे राम ?
Thursday, January 24, 2008
राजपथ से नहीं गुजरी थी पहली परेड
भारतीय गणतंत्र की 58 वीं वर्षगाँठ पर रक्षा मंत्रालय ने अपने पुराने दस्तावेज जारी कर इस धारणा को गलत साबित किया है कि 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र की पहली मुख्य परेड राजपथ से होकर गुजरी होगी।गत अगस्त में मंत्रालय ने अपने ऐतिहासिक दस्तावेज से इस बात का भी खुलासा किया था कि आजादी के बाद पहली बार लाल किले पर तिरंगा 15 अगस्त को नहीं बल्कि 16 अगस्त 1947 को फहराया गया था। रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रकाशित किए जाने वाले 4 फरवरी 1950 के फौजी अखबार में उस ऐतिहासिक दिन का ब्यौरा दिया गया है जब भारतवासी देश को गणतंत्र घोषित किए जाने से गर्वातिरेक में डूबे हुए थे।भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने इर्विन स्टेडियम में सशस्त्र बलों की भव्य परेड की सलामी ली थी और 31 तोपों ने गरज गरज कर दुनिया को संदेश सुनाया था कि अब भारत की सरकार भारत के लोग बनाएँगे और वह भारतवासियों की अपनी और उनके लिए बनने वाली सरकार होगी।फौजी अखबार इतिहास दर्ज करते हुए लिखता है कि 1950 में जनवरी के 26वें दिन बृहस्पतिवार को सुबह दस बजने के अठारह मिनट बाद भारत को संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया। उसके इसके छह मिनट बाद बाबू राजेंद्र प्रसाद को गणतांत्रिक भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई।उस समय गवर्मेंट हाउस कहलाने वाले मौजूदा राष्ट्रपति भवन के दरबार हाल में राजेंद्र बाबू के शपथ लेने के बाद दस बजकर 30 मिनट पर तोपों की सलामी दी गई। उनका कारवाँ दोपहर बाद ढाई बजे गवर्मेंट हाउस से इर्विन स्टेडियम के लिए रवाना हुआ। राजेंद्र बाबू पैंतीस साल पुरानी लेकिन विशेष रूप से सुसज्जित बग्गी में सवार हुए जिसमें छह बलिष्ठ ऑस्ट्रेलियाई घोड़े जुते हुए थे।इस कारवाँ को देखने के लिए सड़कों पर अपार जन समूह उमड़ पड़ा था और लोक मकानों की छतों, पेड़ों शाखाओं और हर सम्भव ऊँचाई वाले स्थानों पर आ जमे थे। इर्विन स्टेडियम में हुई मुख्य परेड को देखने के लिए 15 हजार लोग मौजूद थे। फौजी अखबार के अनुसार इस परेड में नौसेना, इन्फेंट्री, कैवेलेरी रेजीमेंट, सर्विसेज रेजीमेंट के अलावा सेना के सात बैंड भी शामिल हुए थे।गणतंत्र की पहली परेड की शोभा बढ़ाने के लिए इंडोनेशिया के प्रसिद्ध नेता सुकर्णो आए थे। उस समय इंडोनेशिया का नाम युनाइटेड स्टेट्स ऑफ इंडोनेशिया हुआ करता था।
मोदी की मुंबई रैली से हिल गए हैं ठाकरे
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिन पहले मुंबई में हुई रैली से शिवसेना को तगड़ा झटका लगा है। उसे लगने लगा है कि महाराष्ट्र में भाजपा अब अधिक दिनों तक उसे बड़े भाई की भूमिका में नहीं रहने देगी। पार्टी सुप्रीमो बाल ठाकरे ने तो बुधवार को कह भी दिया कि महाराष्ट्र में मोदी और मायावती पैटर्न की राजनीति नहीं चल पाएगी।
महाराष्ट्र में करीब 20 साल से चले आ रहे शिवसेना-भाजपा गठबंधन में शिवसेना अब तक बड़े भाई की भूमिका निभाती रही है। इसी रिश्ते के तहत राज्य की 288 विधानसभा सीटों में से शिवसेना 171 एवं भाजपा 117 पर चुनाव लड़ते रहे हैं। भाजपा की जीत का प्रतिशत शिवसेना से बेहतर रहता है लेकिन सीटों की संख्या में शिवसेना बाजी मार लेती है। गठबंधन की शर्त है कि जिसकी सीटें ज्यादा होंगी मुख्यमंत्री उसी का बनेगा, इसलिए भाजपा मुख्यमंत्री पद की दावेदार भी नहीं बन सकती। भाजपा पिछले दो विधानसभा चुनावों से शिवसेना पर दबाव बना रही है कि दोनों दल बराबर सीटों पर चुनाव लड़ें। शिवसेना लोकसभा में कुछ सीटें भाजपा को अधिक देकर विधानसभा में उसे ठेंगा दिखाती आ रही है। भाजपा इसे इसलिए बर्दाश्त करती रही क्योंकि महाराष्ट्र में बाल ठाकरे जैसा करिश्माई नेता उसके पास नहीं था। मगर बीते रविवार को शिवसेना मुख्यालय के ठीक सामने उसी शिवाजी पार्क में नरेंद्र मोदी को सुनने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी जहां ठाकरे पिछले 40 साल से शिवसेना की रैलियां करते आ रहे हैं। इसी पार्क को नवंबर के अंतिम सप्ताह में मायावती ने भी भर दिया था। भाजपा ने अपनी रैली में शिवसेना को तो बुलाया भी नहीं। मोदी को तालियां भी ठाकरे की तुलना में कम नहीं मिलीं। मतलब यह कि भाजपा को मिशन-2009 के लिए नया तारणहार मिल चुका है। वह एक दिन में छह-सात रैलियां भी कर सकता है। दूसरी ओर शिवसेना प्रमुख की गिरती सेहत के कारण अब वे एक रैली में भी लंबे समय तक बैठ नहीं पाते। भाजपा नेता उन्हें आज भी महाराष्ट्र के शिवसेना-भाजपा गठबंधन का पितृ पुरुष मानते हैं। लेकिन सच्चाई यही है कि 2009 के लोकसभा-विधानसभा चुनावों में मोदी की जरूरत भाजपा के साथ-साथ शिवसेना को भी पड़ सकती है।
महाराष्ट्र में करीब 20 साल से चले आ रहे शिवसेना-भाजपा गठबंधन में शिवसेना अब तक बड़े भाई की भूमिका निभाती रही है। इसी रिश्ते के तहत राज्य की 288 विधानसभा सीटों में से शिवसेना 171 एवं भाजपा 117 पर चुनाव लड़ते रहे हैं। भाजपा की जीत का प्रतिशत शिवसेना से बेहतर रहता है लेकिन सीटों की संख्या में शिवसेना बाजी मार लेती है। गठबंधन की शर्त है कि जिसकी सीटें ज्यादा होंगी मुख्यमंत्री उसी का बनेगा, इसलिए भाजपा मुख्यमंत्री पद की दावेदार भी नहीं बन सकती। भाजपा पिछले दो विधानसभा चुनावों से शिवसेना पर दबाव बना रही है कि दोनों दल बराबर सीटों पर चुनाव लड़ें। शिवसेना लोकसभा में कुछ सीटें भाजपा को अधिक देकर विधानसभा में उसे ठेंगा दिखाती आ रही है। भाजपा इसे इसलिए बर्दाश्त करती रही क्योंकि महाराष्ट्र में बाल ठाकरे जैसा करिश्माई नेता उसके पास नहीं था। मगर बीते रविवार को शिवसेना मुख्यालय के ठीक सामने उसी शिवाजी पार्क में नरेंद्र मोदी को सुनने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी जहां ठाकरे पिछले 40 साल से शिवसेना की रैलियां करते आ रहे हैं। इसी पार्क को नवंबर के अंतिम सप्ताह में मायावती ने भी भर दिया था। भाजपा ने अपनी रैली में शिवसेना को तो बुलाया भी नहीं। मोदी को तालियां भी ठाकरे की तुलना में कम नहीं मिलीं। मतलब यह कि भाजपा को मिशन-2009 के लिए नया तारणहार मिल चुका है। वह एक दिन में छह-सात रैलियां भी कर सकता है। दूसरी ओर शिवसेना प्रमुख की गिरती सेहत के कारण अब वे एक रैली में भी लंबे समय तक बैठ नहीं पाते। भाजपा नेता उन्हें आज भी महाराष्ट्र के शिवसेना-भाजपा गठबंधन का पितृ पुरुष मानते हैं। लेकिन सच्चाई यही है कि 2009 के लोकसभा-विधानसभा चुनावों में मोदी की जरूरत भाजपा के साथ-साथ शिवसेना को भी पड़ सकती है।
Monday, January 21, 2008
गरीबों तक विकास का 5 पैसा पंहुचता हैं।
हिन्दुस्तान में भ्रष्टाचार अपने चरम सीमा पर हैं। यहां के राज नेता सिर्फ एक दूसरे की बुराई देखते हैं। अपने अंदर की कमी का आंकलन नहीं करते हैं। कबीर की एक पंकती हैं -
बुरा जो देखन मैं चला,बुरा ना मिला कोई।
जो दिल देखा आपना मुझ सा बुरा ना कोई।
हिन्दुस्तान के राज नेताओ को चाहिए कि अपना कर्म करें और भारत को विकसीत देश बनाने की सोचें । हर काम को assignment की तरह करना चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि विकास के सौ पैसा में से पंद्रह पैसे गरीबों तक पंहुचता हैं। पर राहुल गांधी का मानना हैं कि अब गांव तक केवल पांच पैसा ही पंहुचता हैं। राहुल गांधी को यह हकीकत समझने में काफी देर हुई। देखना यह हैं कि युवा सांसद कितने सालों में विकास का काम करते हैं। गरीबों को कब तक पचास पैसा ही पंहुचाते हैं।
बुरा जो देखन मैं चला,बुरा ना मिला कोई।
जो दिल देखा आपना मुझ सा बुरा ना कोई।
हिन्दुस्तान के राज नेताओ को चाहिए कि अपना कर्म करें और भारत को विकसीत देश बनाने की सोचें । हर काम को assignment की तरह करना चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि विकास के सौ पैसा में से पंद्रह पैसे गरीबों तक पंहुचता हैं। पर राहुल गांधी का मानना हैं कि अब गांव तक केवल पांच पैसा ही पंहुचता हैं। राहुल गांधी को यह हकीकत समझने में काफी देर हुई। देखना यह हैं कि युवा सांसद कितने सालों में विकास का काम करते हैं। गरीबों को कब तक पचास पैसा ही पंहुचाते हैं।
Sunday, January 20, 2008
बर्ड फ़्लू का कहर कोलकाता में

पश्चिम बंगाल सरकार को हर बार देर से आंखे खुलती हैं। चाहे भारतीय परमानु करार की बात हो या आर्थिक विकास की या बर्ड फ़्लू का मामला। मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टचार्य ने भी देर से ही माना है कि राज्य में बर्ड फ़्लू की स्थिति अत्यंत गंभीर हैं। राज्य सरकार के सुस्ती के कारण यहां कि स्थिति गंभीर बन गयी हैं। पिछले दिनों कोलकाता के दक्षिणी और पूरबी हिस्सों में कई मरी हुई पक्षियाँ पायी गयी हैं।
पश्चिम बंगाल के तीन जिलों में बर्ड फ़्लू के खतरनाक एच 5 एच 1 वायरस से स्थिति गंभीर हो गई हैं। विश्व स्वास्थय संगठन(डब्लूएचओ) ने कहा है कि इस बार बर्ड फ़्लू का
ख़तरा ज़्यादा गभीर हैं क्योंकि पिछले मामलों की तुलना में इसका विस्तार क्षेत्र अधिक हैं और ये क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक हैं।
बीरभूम,दिनाजपूर,सियालदह और कालीघाट जैसे जगहों पर सिर्फ दुकाने बंद कर देने से गंभीर समसया का हल नहीं हो सकता हैं। सरकार को बडे पैमाने पर बर्ड फ़्लू जैसी बीमारी से बचने के उपाये बताने होगें। राज्यों को सील कर सुरक्षा का इंतजाम करना होगा।
बर्ड फ़्लू से पर्यटन क्षेत्र, विमान सेवा उधोग व अन्य व्यवसायों पर भी इसका कुप्रभाव असर पड़ रहा हैं। सरकार को समय रहते पुख़्ता इंतजाम करना होगा। जिससे बर्ड फ़्लू पर काबु पाया जा सके।
CLICK my blog for more
( Source : http://002nas.blogspot.com/ )
Subscribe to:
Posts (Atom)